जनवरी 17, 2016

नया पता: ख़त मेरे

http://khat-mere.blogspot.in/2016/01/pre-post-of-this-blog.htmlलिखना छोड़ा नहीं है। नया घर सजाया है। मन तो नहीं था पर क्या करूँ, यहाँ भी बता रहा हूँ। एकएक कर बताने से अच्छा तरीका यही लगा। आप सबको नया पता बताता चलूँ। जो लोग मेरे यहाँ से जाने के बाद से नाराज़ हैं, उनका हमारा साथ और आगे तक जाये, यही मन में दिल में दिमाग में है।

करनी चापरकरन की कहानी यहीं तक। आगे अगले पन्ने तरतीब बेतरतीब सब के लिए नए पन्ने। पता नहीं कितना यहाँ छोड़ पाया, कितना यहाँ से ले जा रहा हूँ। वक़्त लगता है। पर आप साथ रहेंगे, तो हो जाएगा। नहीं भी ले जा सका, तब भी यह निशान वक़्त के साथ और गहरे होते जाएँगे।

सागर, पूजा तुम दोनों पहले मेहमान हो। आना ज़रूर। संदीप, अब सबको बता दिया।

राकेश, आलोक, लवकेश, संगीता और आप.. सब आना। और जिनके नाम नहीं ले रहा हूँ, वह भी साथ चले आइए। ख़त पर छोड़ा था, ख़त से ही शुरू कर रहे हैं।

नया पता है: ख़त मेरे http://khat-mere.blogspot.in

आवाज़ें..

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...