मार्च 29, 2012

पहला संवाद

आज करीब साल भर पहले लिखी एक कविता हाथ लगी..बस उसी को साझा कर रहा हूँ..!!

03:12PM  05.04.2011

कभी बहुत देर तक चुप, अपने में ढूंढ़ता हूँ
नहीं मिलता मुझे वो
जिससे पुकारूं तुम्हे.
फिर छोड़ देता हूँ सोचना
और बैठा अकेले ही तुम्हे तुम्हारे पास चला आता हूँ
बिना कुछ बोले.

तुम झिकती नही, मेरी तरह
बस बैठी रहती हो
इस इंतज़ार में,
के
मैं कुछ तो कहूँगा.
पर नही,   हमेशा की तरह, आज भी
हम दोनों बैठे एक दूसरे को देखते
कुछ असहज से होते रहते हैं. 

थोड़ी देर बाद तुम अपनी कलाई पर देखोगी
फिर आसमान की तरफ,
और तुम बिन बोले उठोगी
मैं भी, अनमना-सा हो उठुंगा.

आगे क्या हुआ..??
क्या हम साथ साथ कुछ देर अबोले चलते रहे
या
तुमने पीछे मुड़ के देखते हुए हाथ उठाया हिलाया
जिसे कोई नही देख सका
शायद मैं भी नही

और यही था
हमारे बीच पहला संवाद..!!

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