दिसंबर 18, 2014

मोहल्ले की लड़कियाँ

आज दरी पर नई चादर बिछी हुई है। सुबह से ही घर से गेंदे के फूलों की ख़ुशबू आ रही थी। यह किसी बाहर से आने वाले मेहमान के लिए नहीं है। आज शादी के बाद गाँव से पहली बार बड़े लड़के की बहू आ रही है। लड़का अभी पिछले हफ़्ते लौटा है। नौकरी अभी नहीं है। सालभर में हो जाएगी। ऐसा घर में सब सोचते हैं। पढ़ने में मन भी लगाता है। ऐसे ही पढ़ता रहा तब पक्का हो जाएगी। ऐसा आस-पड़ोस वालों को लगता। जबसे वह गाँव से लौटा है तब से उसके दोस्त छेड़ रहे हैं। भाभी को अभी तक कुछ दिया कि नहीं? क्या दे रहा है? उसका दिमाग इन सब चीज़ों में शुरू से नहीं रहा। अगर रहा होता तो शादी से पहले पड़ोस में क्या कम लड़कियाँ थीं, जो अकेली रात में छतों पर इसे बुलाती। वह अपने मन का मालिक था। कभी जाता। कभी नहीं जाता।

वह जब-जब मोबाइल में थ्री जी डेटा कार्ड री-चार्ज करवाता, तब-तब उसे लड़कियों के पास जाने की ज़रूरत महसूस होती। वह उन्हे छूना चाहता। वह साँसें रोके रहता। बहुत पास से, उन्हे बिन पलक झपके देख लेने की इच्छा उसके पेट के निचले हिस्से में महसूस होने लगती। वह जादा देर इस कशिश को अपने अंदर की रगों में दौड़ने नहीं देता। वह कोशिश करता खाना खाने से पहले ही जल्दी से विनोद मेडिकल का एक चक्कर लगाकर लौट आए। फ़िर इतमीनान से बल्ब की रौशनी में एक-एक का चेहरा याद करता जाता।

पर वह अकेला ऐसा महसूस नहीं करता। उसके साथ वह लड़कीयाँ भी करतीं, जिनके मोबाइल में वह टॉकटाइम डलवाता। कभी वह हफ़्ते की लॉटरी एकसाथ निकालता। कब किस लड़की का नंबर आएगा(?) यह सब पर्ची का खेल होता। जिसकी पर्ची निकलती पूरी रात सिर्फ़ और सिर्फ़ उसी लड़की के सपनों में साथ रहता। कभी जो पहले बोल देती, उसके वादों को कभी नहीं तोड़ता।

कितनी कोशिशें की सबने मिलकर। क्या-क्या नहीं किया सबने(?) सब दहेज़ इकट्ठा होजाने तक लड़कियों को रोके रहना चाहते। पर हासिल कुछ नहीं हुआ। मेडिकल स्टोर एक रात बंद हो जाने से उसका कुछ बिगड़ने नहीं वाला। कितनी बार तो कह कर देख लिया। कितना झगड़ते सब उससे। वह अब बिना पूछे किसी नंबर पर रीचार्ज करने लगा था। दोबार चौराहे वाले अखाड़े से पहलवान भेजे। वह भी सब ऐसे ही निकले। उसे कुछ नहीं कहते। उल्टे उनसे जादा रुपये कमाकर पहलवान दंगल करने लौट जाते। 

लेकिन आज रात सब बदलने वाला था। ऐसा उन सारे मोहल्ले वालों को लगता। जिन्होने अपनी लड़कियों को बचाने के लिए उसकी इस जनवरी शादी करवा दी थी। सबके मन में अजीब-सी धुकधुकी थी। सब सोचते रहे थे, देखो अब क्या होता है?

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