जनवरी 16, 2015

दो तस्वीरें..

इसे ढाबली कहते हैं, पर अभी बंद है। एक अरुण की भी है, पान की।

वह बंद है, वह खुली है। जो ट्रॉली के बिलकुल पीछे खुली है,  वही बिसातखाना है। इसकी कहानी फ़िर कभी।


2 टिप्‍पणियां:

  1. एक लम्बी कहानी बयां करती हैं तस्वीरें ..
    बहुत सुन्दर

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    1. जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए आपका धन्यवाद।

      ब्लॉग सेतु पर कोई लिंक ही नहीं मिला इसलिए यहाँ..:)

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आवाज़ें..

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