जून 20, 2015

लखनऊ इसबार : शॉर्ट नोट्स

पॉइंट्स बाय पॉइंट्स
1.दिल्ली से नहीं वहीं से मुकेश को फोन। उसके दोनों नंबर बंद।

2.बक्शी का तालाब/ ताल। लखनऊ से इतनी दूर है, कौन जाएगा? लड़का लड़की अगर गए भी तो कहाँ कहाँ घूमने का मौका मिल पाएगा

3.संदर्भ है अनवर फिल्म का गाना जो यहीं से शुरू होता है, अमीनाबाद के गड़बड़झाला बाज़ार में दो सौ रुपये के झुमके तक पहुंचता है।

4.यहाँ दिल्ली से आरएसी होने पर भी पूरी सीट पर तान के लखनऊ पहुँचना। कैसा प्रेम उन दोनों को बांधे रखे है। वे नहीं चढ़ पाइन तो पति भी नहीं सोये। दोनों रात भर बैठे रहे।

5. अगर लखनऊ से टेम्पो ख़त्म कर दिये जाएँ, तब वहाँ की शहरी बसें काफ़ी महँगी हैं। कल्याण पुर से चार बाग पैंतीस रुपए।

6. चार बाग से चिनहट मेट्रो ट्रेन हो जाने की ख़बर।

7. राजनाथ सिंह के गृह मंत्री बन जाने पर लखनऊ वासियों को बीजेपी की तरफ़ से अभिनंदन आभार।

8. एनडीटीवी का रवीश। जो देश का नंबर वन है। विधान सभा के पास बड़ी सी होर्डिंग।

9. हज़रत गंज में ‘ब्रिटिश बुक डिपो’। कान से कम सुनने वाले अंकल। कुँवर नारायण की ‘रुख़’ के बारे में सुन ही नहीं सके। सीसीडी के बिलकुल सामने।

10. नॉवेल्टी क़ैसरबाग से आते हुए ‘मिश्रा चाट कोर्नर’। दस के चार बतासे। गंजी टांड़।

11.’लक्ष्मी भोजनालय’। एक बार फ़िर साबित हुआ कि हम अपनी आँखों से जादा कभी पहले गयी जगह पर ही जा पहुँचते हैं। खाने के नाम पर शाही पनीर। पर झोंक के मिर्च। आगे से कभी वाजपायी होटल नहीं जाएँगे। लड़कियों को लाकर कुछ घंटे बिताने का अड्डा जादा लगा इस बार। चार मर्दों पर एक लड़की। कहा गाँव कि है हम चाचा हैं। पर कोई सामान नहीं। खाली हाथ। फ़िर रुके भी नहीं। पूर्व परधान मंत्री के नाम पर है।

12. रेसिडेंसी, बुदधा गार्डन, कार्गिल शहीद स्मारक, लेटे हुए हनुमान जी, मड़ीयाओं, टेढ़ी पुलिहिया, पक्की पुलिहिया, सब को पास से गुजरते देखना। कैसे उस इतवार को लोग अलग अलग हैं। जो हज़रत गंज हैं और जो यहाँ थे।

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