दिसंबर 12, 2015

तुम न जाने अब कहाँ होगी..

पता नहीं, जब मैंने इस तस्वीर को देखा, तबसे किन भावों से भर गया हूँ। इसे पल-पल अपने अंदर उतरते देना है। इसके बाद भी नहीं समझ नहीं पा रहा, यह क्या है? सोचता हूँ, तस्वीरें कितनी यात्राएं करती हैं। यह कहाँ से चली होगी। किस कैमरे से किसने कहाँ खींची होगी। कितने सालों बाद यह मेरे मोबाइल की लॉक स्क्रीन पर जमकर बैठ गयी। यह पूरी प्रक्रिया दरअसल क्या है? शायद ऐसा करके उन सवालों को ठिकाने लगा रहा था, जो अंदर उमड़ते रहे हैं। यह मेरे अंदर उपजे उस संघर्ष का नतीजा रही होगी। यह सवाल सौंदर्यशास्त्र से लेकर यौनिकता की हद तक मेरा पीछा कर रहे होंगे। पर जवाब किसी का भी नहीं मिला होगा।  

अब वक़्त जबकि माधुरी दीक्षित और राजश्री प्रोडक्शन की फ़िल्म हम आपके हैं कौन? से बहुत आगे निकलकर सोनाक्षी सिन्हा की उघड़ी हुई मुलायम, फिसलन भरी पीठ वाले खुले ब्लाउज़ तक पहुँच चुका है, मैं तुम्हारे ढके स्तनों को छिपाने की कोशिश देख रहा हूँ। तुम कैसे आकर कैमरे के सामने खड़ी हो गयी होगी। क्या उदय प्रकाश अगर आज पीली छतरी वाली लड़की लिखते, तब उनका ध्यान तुम्हारी तरफ़ जाता। बस ऐसे ही फ़िजूल में पूछ रहा हूँ। मुझे पता है, नहीं जाता। वहाँ पोस्टर उघड़ी हुई पीठ का था। उघड़े हुए स्तन का नहीं।

मेरे अंदर यह सवाल किसी सूई की तरह चुभ रहा है, सन् अट्ठारह सौ पैंसठ  के लगभग बंबई में खींची गयी इस तस्वीर में तुम कहाँ से आ गयी। तुम कौन हो। किसके साथ तुम परदेस चली आई। शायद तुम ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानी खानाबदोश से निकलकर चली आई होगी? तुमने उसके साथ शादी तो की थी न? पर अचानक तुम मुझे वारेन हेस्टिंग के साँड में क्यों दिखाई दे रही हो..? तुमपशतुन तो नहीं हो, कोई तुमसे ज़बरदस्ती शादी तो नहीं करना चाहता..बता दो, बस एक बार..शायद तब नींद सही से आ पाये.. 

नहीं। तुम शायद यह सब नहीं हो। मुझे पता है। तुम पहली गिरमिटिया हो। तुम जलडमरू मध्य में डूब कर मर गयी। तुम्हें तैरना कहाँ आता था।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आवाज़ें..

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...