दिसंबर 10, 2015

अगली मुलाक़ात पर कोई मेरा इंतज़ार करती होगी

कभी-कभी हम नहीं जानते हम क्यों डूब रहे हैं। बस हम डूबना जानते हैं। आहिस्ते से इस पते पर रुक गयी एक नज़र उन सारे दिनों में पीछे ले जाने के लिए काफ़ी होती होगी, जब वह मुझ इस तरह ‘नॉन सीरियस’ से दिखने वाले लड़के में दिख जाने वाली सारी खूबियों को किन्हीं और अर्थों में बदल रही होगी। हम किसी भी सुराख़ को अपने पीछे नहीं छोड़ते, जहाँ से कोई हमारे अंदर झाँक कर देख सके। सामने पड़ना, उन दिनों की फ़ेहरिस्त को दुबारा से टटोलने की तरह आता। वह हम दोनों की मुलाक़ात के हर बिन्दु पर ठहर कर सोचने को मज़बूर हो गयी होगी। पता नहीं कहाँ, कब, कौन से मोड़ पर किस तरह उसे हम दोनों दिख जाते होंगे। बातें मुलाक़ातों में बदलते ही हम दोनों शब्दों से बाहर निकलकर चले आते होंगे।

मुझे साफ़-साफ़ पता है, मैंने कभी यह बात तुम्हें नहीं बताई। जब भी हम आमने-सामने होते तुम्हारी आँखों में झाँकने से पहले अपने अंदर झाँकने की हिम्मत कर तुम्हें वहाँ से बाहर लाते हुए बड़ी मशक्कत करनी पड़ती। कि कहीं तुम्हारी परछाईं को छूने पर तुम्हारे मन की सिलवटों को देख पाता तो अच्छा होता। यह किसी नायक की अनदेखी प्रेमिका को लिखा प्रेम पत्र नहीं है। न तुम्हारी आँखों में मैं अपने ख़ुद के होने की वजह देखता हूँ। यह तो बस ऐसा ही कुछ है जो शब्दों में कह नहीं सकता। मेरे अंदर से निकलकर तुम मुझे हर जगह दिखाई देती हो। मेरी कल्पना में ठहरी हुई सकुचाई कोमल-सी, मुलायम रुमाल के जैसी।

इंतज़ार करते हुए हमारी कोई तस्वीर नहीं है। पर ऐसा होने पर भी एक मिल गयी। बस  तुम्हारा चेहरा छिपा दिया है। बताना कभी, कैसी है?

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आवाज़ें..

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...